MIDA-582 उस रंडी की उत्तेजक तकनीकें सचमुच अद्भुत थीं... मैं पूरी तरह उसमें डूब गया था, एक शब्द भी नहीं बोल पा रहा था, मेरी कामुकता वीणा के तारों की तरह बह रही थी, मैं पूरी तरह भ्रष्ट हो गया था। —कावागुची सकुरा

विवरण

लगभग हर दिन ट्रेन से स्कूल जाने वाली सकुरा एक दरिंदे का शिकार बन गई। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि किसी पुरुष की खामोश, कामुक उंगलियां उसे इतना अद्भुत एहसास दिला सकती हैं... सीधे शब्दों में कहें तो, यही तो वह चाहती थी! उसका दिमाग कहता था कि उसे यह एहसास पसंद नहीं है, पर उसका शरीर इसे तरस रहा था... वह एक शब्द भी नहीं बोल पा रही थी, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसके अंदर कितनी कामुकता उमड़ रही है! उसे भाग्य के लाल धागे ने नहीं, बल्कि इच्छा के धागों ने बांध रखा था। सकुरा धीरे-धीरे वश में हो गई...

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